ईरान में आईआरजीसी के काफिले पर हमला और क्षेत्रीय सुरक्षा का गिरता स्तर

ईरान में आईआरजीसी के काफिले पर हमला और क्षेत्रीय सुरक्षा का गिरता स्तर

ईरान के सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में एक बार फिर खून बहा है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के 14 जवानों की जान चली गई। ये कोई मामूली घटना नहीं है। जब किसी देश की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई को उसके अपने ही घर में निशाना बनाया जाता है, तो सवाल उठना लाजिमी है। सुरक्षा व्यवस्था में चूक हुई या खुफिया तंत्र फेल हुआ? सच तो ये है कि ईरान का यह इलाका लंबे समय से बारूद के ढेर पर बैठा है।

ईरान की सरकारी मीडिया और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, हमला बेहद सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया। आईआरजीसी के जवान एक रूटीन गश्त या मूवमेंट पर थे जब उन पर आईईडी और भारी गोलीबारी से हमला हुआ। 14 मौतों का आंकड़ा छोटा नहीं होता। यह हमला सीधे तौर पर तेहरान की सत्ता को चुनौती देने जैसा है। सिस्तान-बलूचिस्तान का इलाका पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा से सटा है। यहाँ की भौगोलिक स्थिति और राजनीतिक अस्थिरता इसे उग्रवादी समूहों के लिए एक सुरक्षित पनाहगाह बनाती है।

सिस्तान बलूचिस्तान में बार-बार क्यों होते हैं ऐसे हमले

ईरान के इस दक्षिण-पूर्वी हिस्से में अशांति की जड़ें बहुत गहरी हैं। यहाँ सुन्नी बहुल आबादी रहती है जो अक्सर शिया शासित केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाती रही है। 'जैश अल-अदल' जैसे समूह यहाँ सक्रिय हैं। वे खुद को बलूच अधिकारों का रक्षक बताते हैं, लेकिन उनकी कार्यप्रणाली केवल हिंसा और अस्थिरता तक सीमित है।

ईरान हमेशा से इन हमलों के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ बताता रहा है। तेहरान का आरोप है कि अमेरिका, इजरायल और कभी

CT

Claire Taylor

A former academic turned journalist, Claire Taylor brings rigorous analytical thinking to every piece, ensuring depth and accuracy in every word.